ओ भोली-भाली सूरत वाली,
नयन तुम्हारे अजब-गजब है,
होंठ लगे ठहरा सा दरिया,
माथे पर सूरज सी चमक है,
पर पहचान नही ये तेरे,
मेरे दिल में होने कि,
काले पत्थर में हीरे कि,
और सीप के भीतर मोती की!
तू है मोहनी न है रुकमणी न कोई,
परी सुहानी है, न तू गंगा का तट
है और न यमुना का पानी है,
अरे तू तो है वो गाँव की छोरी
जिसकी बात निराली है,
जिसके बिना क्या जीना मरना
दोनों ही फ़नकारी है,
अरे है पहचान यही तो तेरे
मेरे दिल में होने कि, काले पत्थर
में हीरे कि और सीप के भीतर
मोती की!!
न जाने तू कैसे मुझको मेरी
साँसों से पढ़ लेती है, पता नही
तू खुद को कैसे मेरी इच्छा
से ढक लेती है, क्या इतना आसान
है बोलो ऐसे दिल का मिल पाना,
ऐसे दिल बिन क्या जीना और
ऐसे दिल बिन मर जाना,
तो है पहचान यही तो तेरे
मेरे दिल में होने कि, काले पत्थर
में हीरे कि और सीप के भीतर
मोती की!!
(योगेन्द्र भारत)
नयन तुम्हारे अजब-गजब है,
होंठ लगे ठहरा सा दरिया,
माथे पर सूरज सी चमक है,
पर पहचान नही ये तेरे,
मेरे दिल में होने कि,
काले पत्थर में हीरे कि,
और सीप के भीतर मोती की!
तू है मोहनी न है रुकमणी न कोई,
परी सुहानी है, न तू गंगा का तट
है और न यमुना का पानी है,
अरे तू तो है वो गाँव की छोरी
जिसकी बात निराली है,
जिसके बिना क्या जीना मरना
दोनों ही फ़नकारी है,
अरे है पहचान यही तो तेरे
मेरे दिल में होने कि, काले पत्थर
में हीरे कि और सीप के भीतर
मोती की!!
न जाने तू कैसे मुझको मेरी
साँसों से पढ़ लेती है, पता नही
तू खुद को कैसे मेरी इच्छा
से ढक लेती है, क्या इतना आसान
है बोलो ऐसे दिल का मिल पाना,
ऐसे दिल बिन क्या जीना और
ऐसे दिल बिन मर जाना,
तो है पहचान यही तो तेरे
मेरे दिल में होने कि, काले पत्थर
में हीरे कि और सीप के भीतर
मोती की!!
(योगेन्द्र भारत)





