रविवार, 21 जुलाई 2013

कौन है कारण?

मुझे रुलाने लगे है अब
मेरे ही लिए हुए फैसले
वे लोग जिनके सानिध्य में रहकर
मैंने सपनो के लिए लड़ना सीखा
जिन्होंने मुझे मुश्किल निर्णयों
को लेने के लिए साहस दिया
वे सब मुझे कहाँ और क्यों
छोड़कर चले गए है?
मेरे मन में प्रश्न उठता है?
क्या ये वही है-
जिन्होंने मुझे स्वयं से
प्रेम करना सिखाया
जिन्होंने कीचड़ में पंकज
खिलने का सच बताया|
पता नही क्यों मुझे ऐसा
प्रतीत होने लगा है कि
जो प्रशंसा के तीर उन्होंने
मेरे भविष्य निर्माण के लिए छोड़े थे
वो ही आज मेरे विनाश
का कारण बने हुए है|
लेकिन अब बीच रास्ते से लौट पाना
मुमकिन नहीं दिख रहा है
सच तो ये है कि मुझे वो गलियारा
ही याद नहीं है जिसे छोड़कर
मैं यहाँ तक पहुंचा हूँ|
परन्तु इससे इतना तो लगने लगा है
कि मुझसे पाप हो गया है
इतना सारा समय मैंने व्यर्थ
ही गँवा दिया है|
मैंने पिता के विश्वास को तोडा है
उन सपनो का कत्ल किया है
जो रात-रात भर जागकर
मेरी माँ ने मेरे लिए देखे थे|
परन्तु कौन है कारण
चारो ओर फैले हुए नश्वरता
के इस वातावरण का?
मेरे लिए हुए फैसले---
या फिर वे लोग ---
जो मुझे छोड़ कर चले गए है|

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें