रविवार, 13 जनवरी 2019

मुक्तक

मुश्किलों में हँस के जीना जानता
हूँ, मैं..!!

हार के हर विष को पीना जानता
हूँ, मैं..!!

व्यर्थ  के  आरोप  दुनिया भर  के
अंदेशे..!!

मुस्कुराकर   होंठ   सीना  जानता
हूँ, मैं....!!

©योगेन्द्र भारत

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