मंगलवार, 10 जनवरी 2017

मुक्तक- योगेन्द्राश

1.
"तुम्हारे साथ कि जरूरत थी...
'इक पल' में तुम गुजर गये..,
'इक पल' भी तुम न रूके...
'इक पल' में हम बिखर गये.. "

2.
"लफ़्ज होंठो पर टिके आवाज घुँघरूओं से हो,
ऐ जान ! तेरे हुस्न का हिसाब जुगनुओं से हो,
इश्क - विश्क, प्यार - व्यार बेहिसाब रूंह में हो,
ख्वाब हैं तेरी मांग का श्रृंगार मेरे खूं से हो..!!"

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