रविवार, 12 जनवरी 2014

तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!

मेरा प्यार सदा ही है तेरा,
मेरे अधरो का तू किनारा है,
तू भले ही ओढ़ती हो घूँघट,
तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!

मेरे मिलन की चाहत ठुकराकर,
मुझे और करीब बुलाया है,
हाँ भले ही मोहब्बत राजी नही,
तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!

जो ये चाँद अँधेरे से बाहर आकर 
देखे तो उजाला है,
तू भले ही रंगती हो मस्तक,
तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!

सच बोल रहा हूँ सुन लो अब,
तू जो सच कह दे तो बहारा है,
हाँ भले तू हारी हुई बाज़ी है,
तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!

मुझे पता है इस दुनियां से तुमको
कहने में डर लगता है,
अब मान भी लो तेरा पागल दिल
मेरे नाम से धड़का करता है,
गर अब जो मुझे झुठलायेगी तू,
तो मुझे यही दोहराना है,
तू भले ही ओढ़ती हो घूँघट,
तेरा दिल अब भी तो कुंवारा है!
(योगेन्द्र भारत)

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