अजब तेरा संसार है,
मैं गजले बेच रहा हूँ, कान्हा!
ये कैसा व्यापार है?
ज़ज्बात यहाँ पर बिकते है,
हाँथो-हाथ यहाँ पर बिकते है,
कुछ मुट्ठी भर सिक्को से,
हर रोज यहाँ पर बिकते है,
अब मैं भी बेच रहा हूँ वो सब,
जो मेरा श्रृंगार है |
अजब-गजब तेरी....
अब तुमसे मेरी विनती है,
ये जीवन उल्टी गिनती है,
कुछ बदलेगा न लगता है,
शायद ये ही अब 'नियति' है,
तो अब आओ या फिर मुझे
बुलाओ, ये ही मेरी पुकार है |
अजब-गजब तेरी....

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