रविवार, 11 अगस्त 2013

||..मिलन का गीत..||

देखो नभ में पड़ गए झूले,
धरा हुई फुलवारी,
जो कल तक थी दूर-परायी,
वो हुई आज हमारी,
अब उसकी  मांग की रेखा में मेरा
श्रंगार हुआ है,
जो कल तक हारा राजा था वो
सम्राट हुआ है..!!

उसकी भोली-भाली सूरत या हो
उसके ग़जब नयन,
या मैं बोलू ओंठ गुलाबी या फिर
वो शर्मानापन,
अब उसके इन सब गहनों पर मेरा पावन
अधिकार हुआ है,
जो कल तक हारा राजा था वो
सम्राट हुआ है..!!

हर पल हँसना हँसते रहना मेरे
नयनो ने सीख़ लिया,
जो ज़ग की मीना-चविका थी
उसको हमने जीत लिया,
अरे, कुछ तो मेरी चाहत का
उस पर ख़ास हुआ है,
जो कल तक हारा राजा था वो
सम्राट हुआ है..!!

मैंने अपने प्रेम भाव को जिस
पुस्तक में उकेरा था,
उस पुस्तक का अंतिम पन्ना
बिल्कुल कोरा-अधूरा था,
पर उसकी प्रेम की कलम को पाकर
वो भी पूर्ण हुआ है,
जो कल तक हारा राजा था वो
सम्राट हुआ है..!!



गुरुवार, 1 अगस्त 2013

!!...सच...!!

मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि रात काली क्यूँ होतीं है?

मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि सूरज में लाली क्यूँ होती है?-------

जब एक रोज बारिश में बैठे भिगा रहा था तन,

तब ही इसका उत्तर यूँ ही उठ गया मेरे मन,

कि रात काली नही होती सूरज में लाली होती है,

और जब ये कहीं सों जाता है,

तो इसकी परछाई बादल के संग सोती है,

और जिसको हम कहते है रात वो दरसल रात नहीं,

वो दो प्रेमी के मिलन का मुहरत है,

जो अविरत ही आता है,

इस सूनसान अंधियारे में सूरज भी हनीमून मनाता है,

और जिसे हम समझते है पानी कि बूँदे,

वो केवल पानी नही,

वो दो प्रेमी के मिलन का परिणाम है,

उनके इस त्याग को यूँ जाया न करो तुम,

इन सच्चे प्रेमियों कि संतानों को यूँ बहाया न करो तुम...!!

कुछ शब्द:
           
             ''देखें बहुत से प्रेमी दुनिया में पर
              तुमसा प्रेमी युगल न पाया,
              देखें लाख करोड़ो त्यागी पर
              तुमसा महात्यागी ना पाया,
              तो झुक कर नमन है तुमको
              ऐ देवो तुमको मेरा प्रणाम है,
              हाय लगे मेरी उस मानव को
              जिसने किया तेरा अपमान है|''