बुधवार, 17 सितंबर 2014

!!..रिश्तो की सच्चाई..!!

                                                 
स्थिति(1):

धरती अम्बर और सितारे सब तो तेरे साथ खड़े है,
रिश्ते नातेदर सम्बन्धी सब कोई तेरे साथ खड़े है,
दिशा समय और क्या बहारे सब तो तेरे साथ खड़े है,
मगर सोच क्यों इतने सगरे यूँ ही तेरे साथ खड़े है,
आखिर क्यों तेरे घोर विरोधी यूँ ही इतने शांत खड़े है,
क्यों की तू अपने पैरों पर बिना सहारे खड़ा हुआ है,
क्यों की तू है सुखी संपन्न इसलिए लोगो से पटा हुआ है,



स्थिति(2):

धरती अम्बर और सितारे सब कोई तुमको छोड़ चले है,
रिश्ते नातेदार सम्बन्धी हर कोई नाता तोड़ चले है,
दिशा समय और क्या बहारे सब कोई तुमको छोड़ चले है,
मगर सोच क्यों इतने सगरे अपने मुँह को फेर चले है,
आखिर क्यों तेरे सगे-सम्बन्धी  तुमसे नाता तोड़ चले है,
क्यों की तू अब काल सर्प के मुख में विकट फँसा हुआ है,
क्यों की तू है दुखी-दरिद्र इसलिए हर कोई तुझसे विलग हुआ है,